केजरीवाल के काम को नकारात्मक लोग शक की नज़र से देख रहें हैं। ऐसे माहौल में हर सुधारवादी पहल को सलाम और समर्थन करना चाहिए। आलोचना से परिवर्तन के उम्मीद की भ्रूण हत्या हो जाएगी। आलोचना बहुत सरल है लेकिन पहल बहुत कठिन है। इस वक़्त समाज और देश में परिवर्तन की सख्त जरूरत है। इसके लिए हो रहे प्रयास में हमें भागीदर बनना चाहिए न कि आलोचना में रस लेना चाहिए।
No comments:
Post a Comment