Saturday, 13 October 2012

अच्छे और बुरे काम


यह समझना बड़ा कठिन है कि कब इन्सान भगवान बन जायेगा और कब शैतान बन जायेगा। इन
दोनों रूपों में एक ही आदमी को अलग-अलग समय पर देखा जा सकता  है। शायद जब आदमी प्रेम
और आनंद से भरा हुआ होता है तब वह भगवान जैसे काम करता है और जब वह नकारात्मक
भावों से भरा होता है तब उससे शैतान वाले काम होते हैं। बहरहाल यह पहेली शाश्वत है और बहुत
कठिन है। अच्छे और बुरे भाव आदमी में हरदम मौजूद रहते हैं, मात्रा कम ज्यादा ज़रूर होती है।




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