Saturday, 13 October 2012

प्रेम मुक्त करता है, बाँधता नहीं


आज खापों की महापंचायत जुटी थी यह तय करने के लिए कि लड़कियों की शादी की उम्र कितनी कम कर दी जाय। इन बुजुर्गों का मानना है  कि वे अपने बच्चों को प्यार करते हैं। सच सारी दुनिया  जानती है, सिवाय उन बुजुर्गों के। प्रेम सामने वाले को महत्वपूर्ण मानता है, अपने को नहीं। प्रेम जीवन का सौन्दर्य है, कोई ज़बरदस्ती नहीं। प्रेम कोई व्यवस्था नहीं है, बल्कि परम व्यवस्था है। ये बुजुर्ग संसार का सौन्दर्य नष्ट कर रहें हैं।


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